पंडित तरुण शर्मा जी, उज्जैन के अनुभवी एवं विद्वान पंडित, पिछले 10+ वर्षों से शास्त्रसम्मत विधि-विधान के अनुसार पूजा-अनुष्ठान कराते आ रहे हैं। महाकाल की नगरी में जन्मे और पले-बढ़े होने के कारण, इन्हें वेद, पुराण और संहिताओं का गहन अध्ययन तथा पारंपरिक पूजा-पद्धति का व्यापक अनुभव प्राप्त है।
हम उज्जैन में महाकालेश्वर , शिप्रा नदी, एवं पवित्र ज्योतिर्लिंगों की महिमा के बीच सभी प्रकार की पूजा–पाठ और अनुष्ठान करते हैं, जैसे:
!! जय श्री महाकाल !! क्या है "कालसर्प योग" सामान्यतः
जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु...
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मंगल ग्रह यदि जन्मकुंडली के लग्न, चतुर्थ
भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, द्वादश भाव में हो तो कुंडली को.
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महामृत्युंजय मंत्र का जप क्यों किया जाता
है? शास्त्रों और पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति और अकाल
मृत्यु....
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पितृदोष और कालसर्पदोष का सबसे प्राचीन
स्थान सिद्धवट घाट है यहीं पर पितरों को मुक्ति प्रदान होती है ..
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महर्षि नारद के अनुसार- अनेन विधिनां
सम्यग्वास्तुपूजां करोति य:। आरोग्यं पुत्रलाभं च धनं धान्यं लभेन्नदर:
॥
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बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर
एक दूसरे को किन्ही भी भावो में बैठ कर देखते हो, तो गुरू
चाण्डाल.
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